कुछ न्यूज़ चैनल मनमोहन सिंह जी को "सिंह इस किंग " के नाम से संबोधित कर रहे है । पर वो सिंह इस किंग नही बल्कि सर्कस के किंग बन के रह गए। अनिल रघुराज जी ने सही कहा है की कुछ जयचंदों ने नोटों की वजह से करोडो लोगो के विश्वास को तोड़ दिया । अगर इस जयचंदों का नाम दुनिया के सामने आ भी जाए तो क्या हे इन्हे जो करना था कर दिया अब इन के किए का हम लोगो को भुगतना हे ।
ये देश का दुर्भाग्य ही है जो इन कुतो को "रोटी ओउर बोटी" (नोट ओउर वोट) दे रहा है। कम से कम बीजेपी को तो अपने भविष्य का पता चल गया अब अगले चुनावो से पहले उसे अपने घर के अंदर की ओउर बहार की दीवारों को भी मजबूत कर लेना चाहिए ।


2 comments:
देश और लोकतंत्र के हित के लिये 'रिश्वत-प्रकरण' की सच्चाई देश के सामने आना आवश्यक है। आरोप सच है या झूठ, दोनों ही सूरतों मे इस मामले का खुलासा होना ही चाहिए, ताकि लोकतंत्र और संसद के प्रति जनता का विश्वास बना रहे।
Word Verification को हटा दो तो आप की मेहर बानी होगी, ओर लोग टिपण्णिया भी ज्यादा देगे, एक सुझाव
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